Section A (खंड – क) : अपठित बोध
खंड–क में विद्यार्थियों की पढ़ने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता को जांचा जाता है। इसमें छात्रों को ऐसा गद्यांश या काव्यांश दिया जाता है जो उनकी पाठ्यपुस्तक से नहीं होता। विद्यार्थियों को उस गद्यांश को ध्यान से पढ़कर उससे जुड़े प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।
अपठित बोध का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि छात्र किसी भी नई जानकारी को पढ़कर उसका अर्थ समझ सकें और अपने शब्दों में उसे व्यक्त कर सकें। जब छात्र किसी नए गद्यांश को पढ़ते हैं, तो उनकी सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता विकसित होती है।
इस भाग में आमतौर पर दो प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। पहला अपठित गद्यांश होता है जिसमें किसी विषय पर आधारित अनुच्छेद दिया जाता है और उससे संबंधित बहुविकल्पीय तथा लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं। दूसरा अपठित काव्यांश होता है जिसमें कविता का एक अंश दिया जाता है और उसके अर्थ, भाव तथा संदेश से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
अपठित बोध विद्यार्थियों को यह सिखाता है कि वे केवल रटने पर निर्भर न रहें बल्कि किसी भी नई जानकारी को समझने की क्षमता विकसित करें। यही कारण है कि इस भाग के माध्यम से विद्यार्थियों की भाषा समझने की क्षमता, शब्द ज्ञान और तर्क शक्ति को परखा जाता है।
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Section B (खंड – ख) : व्यावहारिक व्याकरण
खंड–ख में हिंदी भाषा के व्याकरण से संबंधित विषयों का अध्ययन कराया जाता है। यह भाग छात्रों को भाषा की सही संरचना और शुद्ध प्रयोग सीखने में मदद करता है।
इस भाग में मुख्य रूप से उपसर्ग, प्रत्यय, समास, अलंकार तथा वाक्य भेद जैसे विषय शामिल होते हैं। इन सभी विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया जाता है कि शब्दों का निर्माण कैसे होता है और भाषा में उनका सही प्रयोग कैसे किया जाता है।
उपसर्ग और प्रत्यय के माध्यम से छात्र सीखते हैं कि किसी शब्द के पहले या बाद में कुछ अक्षर जोड़ने से उसका अर्थ कैसे बदल जाता है। समास के माध्यम से यह सिखाया जाता है कि दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया और संक्षिप्त शब्द कैसे बनाया जाता है।
अलंकार हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण भाग है जो भाषा को सुंदर और प्रभावशाली बनाता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी यह समझते हैं कि साहित्य में भाषा को आकर्षक बनाने के लिए किन-किन अलंकारों का प्रयोग किया जाता है।
व्याकरण का यह भाग विद्यार्थियों को भाषा की शुद्धता, स्पष्टता और प्रभावशीलता सिखाता है। जब छात्र व्याकरण को अच्छी तरह समझ लेते हैं तो वे सही वाक्य बनाना और अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना सीख जाते हैं।
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Section C (खंड – ग) : पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक
खंड–ग में विद्यार्थियों को उनकी पाठ्यपुस्तक के गद्य और पद्य पाठों का अध्ययन कराया जाता है। इसमें विभिन्न लेखकों और कवियों की रचनाएँ शामिल होती हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को साहित्य, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं की समझ मिलती है।
इस भाग में विद्यार्थियों को कहानी, निबंध, कविता और अन्य साहित्यिक रचनाएँ पढ़ाई जाती हैं। उदाहरण के रूप में पाठ्यपुस्तक में “दो बैलों की कथा”, “ल्हासा की ओर”, “उपभोक्तावाद की संस्कृति”, “मेरे बचपन के दिन” जैसे कई महत्वपूर्ण पाठ शामिल होते हैं। इन पाठों के माध्यम से विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, सामाजिक समझ और मानवीय भावनाओं के बारे में जानकारी मिलती है।
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कविता खंड में विभिन्न कवियों की रचनाएँ होती हैं जो विद्यार्थियों को भाषा की सुंदरता और साहित्य की गहराई से परिचित कराती हैं। इन कविताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति, देशभक्ति, मानव जीवन और समाज के विभिन्न पहलुओं के बारे में समझ मिलती है।
पाठ्यपुस्तक का अध्ययन केवल परीक्षा की तैयारी के लिए ही नहीं होता, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साहित्य पढ़ने से विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित होती है।